Showing posts with label Dehradoon. Show all posts
Showing posts with label Dehradoon. Show all posts

Friday, February 10, 2017

Dehradun - City on its Pathway from Ancient to Modern

Dehradun, capital city of Uttarakhand capital and center of Garhwal, a city about which the famous Beatles Musical Band's member George Harrison's had written and sung a song in 1969, -
Dehradun Dehradun
Many roads can take you there, many different ways
One direction takes you years, another takes you days
Dehra Dehra Dun

Written in 1969, for the song, everyone can have their meaning and significance.
Well a lot has changed since then in Dehradun. 
There is much to see here, which is:

  • Robber's Caves
  • Sahasra Dhaara 
  • Mindrolling Monestry
  • Lacchiwala
  • Sri Raam Rai Gurudwara 
  • Tapovan
  • Rajaji National Park 
  • Tapkeshwar Temple 
  • Kalanga Memorial
  • Chandra Baani
  • Lakshman Siddh 
  • Forest Research Institute
  • Santola Devi Temple
  • Wadia Institute
  • Malsi Deer Park

Wednesday, February 8, 2017

देहरादून - अतीत से वर्तमान की पगडंडी पर बसा एक शहर


देहरादून, उत्तराखंड की राजधानी और गढ़वाल का केंद्र, एक ऐसा शहर जिसके  सुप्रसिद्ध म्यूजिकल बंद बीटल्स के सदस्य जॉर्ज हैरिसन ने 1969 में एक गीत लिखा था और उसे गाया भी था - 
Dehra Dehra Dun
Many roads can take you there, many different ways
One direction takes you years, another takes you days
Dehra Dehra Dun

1969 में लिखे गए इस गीत के लिए, सबके अपने अपने अर्थ और मायने  हो सकते हैं। 
ख़ैर तब से अब तक देहरादून में काफी कुछ बदल चुका है।  1900 में पहली बार यह शहर बाकी देश से रेल मार्ग के ज़रिये जुड़ा।  तब पहली बार हरिद्वार से देहरादून के लिए रेलगाड़ी चली थी।  फोन की घंटी को चहचहाने में अगले 1 साल और लगे, यानी 1901, जब यहाँ टेलीफोन सेवा प्रारम्भ हुई।  

शिवालिक श्रेणी और हिमालय से घिरी हुई इस ख़ूबसूरत दून घाटी के देहरादून नाम होने के पीछे भी एक कथा है। कहा जाता है कि श्री राम राय जी के पुत्र गुरु श्री हरराय जी जब इस  घाटी में आये तो उनके शिष्यों ने उनके लिए यहाँ कैंप (camp) लगाया था, जिसे डेरा भी कहा जाता है। 
वक़्त के साथ डेरा हुआ देहरा और फिर वक़्त ने ही इसमें दून शब्द भी जोड़ दिया और फिर इस घाटी का नाम पड़ा देहरादून।  

पहाड़ों की ढलानों पर मिलते हैं आप को ख़ूबसूरत गाँव। गाँव जिनमे आप को नज़र आएगी बहुसांस्कृतिक झलक। गाँव - शहर - मेट्रो-शहर के बीच वाले स्थानों पर बसे इस शहर की छटा में मिलती है आप को नेपाल, हिमाचल, तिब्बत और पंजाब की संस्कृति की झलक, बड़े तरतीब से एक दुसरे से सामंजस्य बिठाये।  
परंपरागत पोशाकों में मशहूर है ऊनी कम्बल (लाबा), जो अभी भी ऊपर के गांवों में पहना जाता है। स्त्रियां पूरे बांह की कमीज़ और जाकेट (अंगरा) के साथ साडी बड़ी खूबसूरती से पहनती हैं। साथ ही युवतियों में घाघरा का प्रचलन भी है।  

यहाँ देखने के लिए बहुत कुछ है, जो है :   

  • रॉबर्स केव ( Robbers Caves )
  • सहस्र धारा ( Sahasra Dhaara), 
  • मोनेस्ट्री ( Mindrolling Monestry), 
  • लच्छीवाला ( Lacchiwala), 
  • श्री राम राय गुरुद्वारा ( Sri Raam Rai Gurudwara), 
  • तपोवन (Tapovan), 
  • राजाजी नेशनल पार्क ( Rajaji National Park ), 
  • टपकेश्वर मंदिर ( Tapkeshwar Temple ), 
  • कलंगा स्मारक ( Kalanga Memorial), 
  • चंद्रबाणी (Chandra Baani), 
  • लक्ष्मण सिद्ध (Lakshman Siddh), 
  • वन अनुसंधान संस्थान ( Forest Research Institute),  
  • संतोला देवी मंदिर (Santola Devi Temple ), 
  • वाडिया संस्थान ( Wadia Institute), तथा 
  • मालसी डियर पार्क (Malsi Deer Park)
 कुछ हम देख पाए, कुछ अगली बार के लिए रह गए।



Corridors of Forest Research Institute







प 
Sahastra Dhaara 

View from Maa Santala Devi Temple 
पर्यटन के अतिरिक्त, देहरादून अपने शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी जाना जाता है, जिनमे मशहूर हैं, दून एजुकेशन और वेल्हम्स स्कूल जहाँ से पढ़ कर निकले लोगों का राजनीति से ले कर अकादमिक तथा बॉलीवुड तक में बोल बाला है।
2000 में उत्तराखंड के बनने के बाद निश्चय ही इस शहर में बहुत कुछ बदला, जिसे हम विकास का नाम दे सकते हैं। पर, 2011 में आये गढ़वाली गायक नरेन्द्र सिंह नेगी का लिखा एक गीत, जिसे मैंने अपने चंडीगढ़ के प्रवास के दौरान अपने रूममेट से सुना था, (बोल मुझे याद नहीं, अर्थ है ); 'मेरे को पहाड़ी पहाड़ी ना बोलो, मैं देहरादून वाला हूँ ', काफी कुछ कह जाता है।  
यहाँ के लोग खुद को पहाड़ी कहे जाने को ले कर बहुत संवेदनशील हैं। ये गाना उसी और संकेत करता है। ऐसा मेरे कई कॉलेज के मित्र जो गढ़वाल से हैं, उन्होंने ही बताया।  

देहरादून के विकसित होने का इतिहास सालों पुराना है, जिसका अपना ही महत्व है, परंतु इससे अधिक महत्व इस बात है कि, यह खूबसूरत घाटी सदियों पुराने  इतिहास को नहीं ढो रही है बल्कि यह एक आधुनिक शहर हो चुका है।  

यहां  की चका चौन्ध, संकल्पना, भौतिक विकास , यातायात, संचार की सुविधाएं इस बात को चीख चीख कर कहना चाहती हैं की यह हमारे ही विकास की कहानी  है।  
भले ही तथाकथित रूप में आधुनिक शहरों में शुमार होते हों, लेकिन मूल्य और परम्पराओं की जकड़न अभी भी हमें नए और पुराने के द्वन्द के बीच फंसाये हुए है।  

पहाड़ों को आर-पार जोड़ते यातायात, संचारक्रांति, इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ साथ इस शहर की राजनितिक आबोहवा और सामाजिक तथा आर्थिक जीवन भी बहुत बदला है।  पिछले कुछ वर्षों में यहाँ मल्टीप्लेक्स, शॉपिंग मॉल्स, कैफ़े हाउस इत्यादि बहुतायत में खुले हैं पर अभी भी बड़े शहरों का रंग चढ़ने में वक़्त है।  


- आलोक कुमार उपाध्याय 

Powered by Blogger.